मंगलवार, 21 सितंबर 2010

आप किस नहाने के साबुन का इस्तेमाल करते हैं?(यह विज्ञापन नहीं है)


आप भी सोच रहे होंगे अजीब खब्ती आदमी है ,जब लोग बाग़ फैसले की आख़िरी घड़ी का दम साधे इंतज़ार कर रहे हैं तो इसे साबुन जैसी तुच्छ चीज सूझ रही है ...मैं समझता हूँ (अपनी अल्प बुद्धि से ) कि बड़े बड़े मसलों/मसायल  को बड़े लोगों के लिए छोड़ देना चाहिए -जिस काम के लिए पूरा तंत्र सक्रिय हो ,मशीनरी चुस्त दुरुस्त हो फिर हम छुटभैये क्या खाकर कुछ बना बिगाड़ लेगें ..तो आईये कुछ साबुन वाबुन जैसी रोजमर्रा की छोटी बात पर ही समय जाया कर लिया जाय ..

इस पोस्ट को लिखने की जहमत क्यूं आन  पडी यह तो मैं आखीर में बताऊंगा मगर अभी आपसे अपने कुछ सोप -अनुभवों को बाँटना चाहता हूँ ...बचपन के दिन याद आते हैं तो नहाने के साबुन की वो लाल वाली बड़ी लाईफबाय की  बट्टी बरबस ही याद हो उठती है ..उस समय कपडा धोने के लिए सनलाईट की सफ़ेद बट्टी और यही लाईफबाय ही देखने को मिलता था ..बाद में तो धोने के साबुन के अलावा डिटर्जेंट की एक बड़ी रेंज ही आ गयी ....तब भी हाट बाजार की  दुकानों पर लोग  "सनलाईट  सोप साबुन" ही मांगते  नजर आते थे .  नहाने वालो साबुनों में लाईफबाय की मोनोपोली को दूसरे कई साबुन ब्रैंड ने चुनौती दी ...उनमें एक तो मोती था जो गोल गोल बड़ा सुडौल सा था और दूसरा भीनी सुगंध वाला खस साबुन था ..पियर्स भी तभी आ गया था जो अभिजात्य लोगों की पसंद था ,तब भी इसका दाम तनिक अधिक ही था -आम लोगों के लिए  लक्स जब सिने तारिकाओं के फोटो के साथ  बाजार में आया तो  गाँव गाँव में लक्स की धूम मच गयी ..लोग नहाते भी थे और रैपर पर स्वप्न सुन्दरी की मोहक अदाओं का आकंठ पान भी करते थे- लगभग यही समय हमाम का भी था ...और बाद में नीम, डेटाल,डव ,और अब तो न जाने कौन कौन नए देशी ब्रैंड तथा अंतरराष्ट्रीय ब्रैंड केमी वगैरह भी बाजारों में अपनी पैठ बना चुके हैं ..कुछ नाम भूले भटके  छूटे होंगे  तो आप बताएगें ही ...

मैं इन सभी साबुनों की बात नहीं कर रहा ...वैसे भी नहाने के मामले में मैं बहुत कोसे जाने वाला प्राणी हूँ ....ज़रा भी मौका मिला तो एकाध दिन नहाने से नागा भी कर जाता हूँ ..साबुन तो एक हप्ते में एक बार ही लगाता  हूँ -एक जीवशास्त्री होने के नाते मेरे अपने तर्क हैं ..रोज रोज साबुन लगाने से देह का  मित्र जीवाणु फ्लोरा तो विलुप्तप्राय होता ही है ,साथ ही देह की कुदरती मानुष गंध -फेरोमोंन का भी सफाया हो जाता है ....जो लोगों में परस्पर जैव रासायनिक संचार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण जरिया होता है -मनुष्य के पारस्परिक व्यवहार ,आक्रामकता ,प्रेम  सबंध आदि के निर्धारण /नियमन में फेरोमोंन की बड़ी भूमिका है -मगर यहाँ विषयांतर न करके मैं अपने सोप चर्चा पर वापस आता हूँ ...  हाँ तो मुझे एक दूसरा ही साबुन किशोरावस्था से ही बेहद पसंद है ...वह है लिरिल ..लगता है मेरी कोई कंडीशनिंग इसके साथ हो गयी थी जो आज भी अवचेतन में कायम है -मुझे याद है जब मैंने पहले इसे देखा था तो इसके रैपर पर  एक सद्यस्नाता अर्ध वसना नवयौवना का चित्र था ....मुझे सेलिब्रिटी सौन्दर्य नहीं लुभाते ..सौन्दर्य की मेरी अपनी धारणा है ,पैरामीटर और इंडायिसेज हैं -लोग बाग़ हेमा मालिनी पर लहा लोट हो रहे थे और मैंने अपना समस्त सौन्दर्यबोध उसी नवयौवना पर केन्द्रित कर दिया -लिरिल मेरी पहली पसंद बन गया था ....

अब इतना उल जुलूल पढने के बाद आईये इस पोस्ट की हेतु पर -आज ही मैंने लिरिल का नया स्वरुप देखा ..लिरिल २००० जिसमें वह नवयौवना तो नहीं है मगर  एक प्यारा सा परिवार है -पति पत्नी और एक प्यारी सी चुलबुली बिटिया का ..जैसे यह मेरे साथ ही बड़ा होता गया हो बाल बच्चेदार .सोने में सुहागा यह कि इसमें टी ट्री आयल(Tea tree oil, or melaleuca oil,)  मिला हुआ है जो एक जाना माना जर्म रोधी है और यह मुझे किसी और साबुन में नहीं दिखा ..टी ट्री आयल न्यू साउथ वेल्स आस्ट्रेलिया के उत्तरी पूर्वी खाड़ी के क्षेत्रों में पाए जाने वाले देशज पौधे Melaleuca alternifolia,की पत्तियों से प्राप्त होता है और इसमें अद्भुत एंटीसेप्टिक और जर्म रोधी चिकित्सीय  गुण हैं ...इसमें त्वचा सौन्दर्य को टोन अप किये रहने के भी गुणों के दावे होते रहे हैं और अब वैज्ञानिक अध्ययनों से इसके कई त्वचा रोगों में कारगर होने के प्रमाण भी मिल रहे हैं ...यह कई तरह के त्वचा के विषाणु ,जीवाणु गत रोगों ,फफूंद और माईट-स्केबीज (खुजली ) जनित रोगों में प्रभावकारी  पाया गया है ... त्वचा के कुछ विकारों को दूर करने में यह चमत्कारी असर  वाला पाया गया है ...आम के आम गुठलियों के दाम -सौन्दर्य प्रसाधन भी और त्वचा की मुकम्मल सुरक्षा भी ..मैंने एक साथ चार  लिरिल 2000 ले लिया (तीन के साथ एक मुफ्त ) ..आप भी एक ट्राई कर सकते हैं ....


83 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा...आप भी पुराने पापी निकले :)

    लिरिल का विज्ञापन और उस विज्ञापन का झरना हमें अभी भी याद है :)

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  2. अरे ! हम भी कुछ दिनों से सोच रहे थे कि हम सभी लोगों को "फियामा डी विल्स" के बारे में बताएँ.
    मेरी त्वचा बहुत अधिक संवेदनशील है, इसलिए हमेशा पियर्स इस्तेमाल करना पड़ता है. उससे भयंकर बोर हो चुकी हूँ. पर जबसे ये साबुन आजमाया है, मुझे एक विकल्प मिल गया. उसमे भी टी ट्री आयल है.

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  3. हमें तो पियर्स से बहुत प्रेम रहा है, बचपन से।

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  4. वाकई यह साबुन का विज्ञापन नहीं है... :)

    हम तो पहले चंद्रिका से नहाते थे अब पार्क एवेन्यू से नहाते हैं (लक्झरी डेनिम सोप) :) :)

    अब अरामस्क इतनी आसानी से मिलता नहीं है, नहीं तो अरामस्क का तो जबाब ही नहीं।

    कभी अरामस्क से नहाईयेगा सारे साबुन भूल जायेंगे, गारंटी है हमारी।

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  5. कुदरती मानुष गंध -फेरोमोंन की अब क्या आवश्यकता रह गयी है. हर चीज के विकल्प हैं. आपने मैसोर सेंडल/केरल सेंडल को भुला दिया. केरल सेंडल सबसे पुरानी थी और उन्हीं के कारखाने में प्रशिक्षण लेकर मैसोर सेंडल का उदय हुआ था. इसका अपना इतिहास है. लिरिल हमें भी अछि लगती थी. इसलिए आजकल सिंथोल लेमन वाला प्रयोग करते हैं. यहाँ आसपास के माल्स में तो अभी लिरिल २००० नहीं आई है.

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  6. पियर्स से नहाते थे जब खुद खरीद कर लाते थे . अब तो जो मिल जाये उसी से काम चला लेते है .

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  7. नहाते वक्त मैं सिर्फ ये देखता हूँ कि पानी भरपूर होना चाहिए और सर्दियों के ठंडा बिलकुल भी नहीं होना चाहिए. इसके अतिरिक्त साबुन कौन सा है इस पर कभी भी ध्यान नहीं देता. हरा लाल पीला कैसा भी साबुन हो अपने को चलता है. साबुन द्रव्य रूप में हो या ठोस इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता है. आज सुबह सुबह ही डिटोल हैण्ड वाश से जमकर नहाया है. डिटोल कि भीनी भीनी गंध अभी भी साथ है. वैसे मेरे शरीर से किसी भी प्रकार कि गंध नहीं आती. ना मेरे कपड़ो से और ना ही मेरी जुराबों से चाहे मैं उन्हें कितने ही दिनों तक क्यों ना पहने रहूँ.

    हाँ आज ये पहली बार पता चला कि हमारी देह पर कोई देह का मित्र जीवाणु फ्लोरा भी होता है जो साबुन से ख़त्म हो जाता है. इस नयी जानकारी के लिए धन्यवाद.

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  8. जिस काम के लिए पूरा तंत्र सक्रिय हो ,मशीनरी चुस्त दुरुस्त हो फिर हम छुटभैये क्या खाकर कुछ बना बिगाड़ लेगें ..
    आपने बिलकुल सही फरमाया
    लोग क्यूँ नहीं समझते इत्ती सी बात

    हा..हा..हा..हा..
    आप भी न बस आप ही हैं :))
    हमारा तो पियर्स पर दिल कुछ ऐसा आया की आज तक उससे चिपके हुए हैं
    -
    -
    -
    अरविन्द जी आप ब्लॉग जगत के सर्वाधिक मौलिक लेखक हैं ..... विविधता तो इस कदर कि आपकी अगली पोस्ट के विषय के बारे में कोई 'माई का लाल' अनुमान नहीं लगा सकता ब्रह्माण्ड का कोई विषय ऐसा नहीं जिस पर आपकी अविरल लेखनी बह न सके :)

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  9. फियामा डी विल्स" के बारे में बताएँ.
    @मुक्ति
    ताज्जुब अभी यह बट्टी हम लोगों की खत्म नहीं हुयी ..कल से हम लिरिल २००० पर स्विच ओवर कर रहे हैं
    हमने ध्यान नहीं दिया कि इसमें भी टी टी आयल है ....मगर है भी बहुत अ

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  10. @विवेक जी पार्क अवेन्यू को अच्छा ऐड किया आपने ...इस्तेमाल कर चुके हैं और एरामस्क तो अब
    दिखता नहीं -एक ज़माने में कस्तूरी के गंध वाले फार में इस सोप के हम भी कायल रह चुके हैं !

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  11. सुब्रमन्यन साहब ,
    जी मैसूर सैंडल और सिंथाल की अच्छी याद दिलाई आपने ..
    मैं जब मैसूर गया था एट्तीज में तो एक दर्जन लाया था बाद में पता लगा की वह हर जगह मिलता है !

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  12. प्यारे प्रकाश जी ,कुछ ज्यादा ही नहीं हो गयी .... :)

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  13. मुक्ति
    सचमुच फियामा डी विल्स दिल के आकार का हरे पारदर्शी रंग का बढियां साबुन है !

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  14. सर आपकी पोस्ट पढ के मुझे तो ओके नहाने का बडा साबुन की याद हो आई ....आजकल कभी फ़ियमा डि विल्स तो कभी मेडिमिक्स ..और जाने कभी कोई आता रहता है । जानकारी नई थी मेरे लिए

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  15. अजय भाई ,
    ओके का बड़ा सोप सुना तो मगर इस्तेमाल नहीं किया ,गंगा ,रोज निरमा का नहाने का साबुन -ये सब चल नहीं पाए !

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  16. वाह. यह साबुन चर्चा भी खूब रही. बहुत सी चीज़ें याद आ रही हैं. दादाजी एक-दो किलो का गाय छाप साबुन लाते थे जिससे कपडे धोने पर पीले हो जाते थे फिर उनमें नील लगी जाती थी. रानीपाल या टीनोपाल याद है आपको? उन साबुनों को कभी तो धागे से और कभी चाकू से काटना पड़ता था. अभी भे वैसे साबुन बहुत सस्ते मिलते हैं.

    मनुष्यों में फेरोमोंस का होना विवाद का विषय है. कतिपय कीट और पशुओं में फेरोमोंस होते हैं. सूअरों के फेरोमोंस के बारे में कहा जाता है की मनुष्यों के फेरोमोंस भी ऐसे ही होते होंगे इसलिए कुछ उत्तेजक स्प्रे आदि में उनका उपयोग किया गया है. क्या सूअरों के फेरोमोंस से बने परफ्यूम आदि लगाने पर सूअरों के बाड़े में जाना एक अलग अनुभव नहीं होगा?

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  17. What a strange coincidence! I tried the same soap just three days ago, and liked it as much as you did. Didn't know about the (claimed) herbal benefits of this one but the fragrance is keeping me hooked.

    BTW, I am using 'Cinthol' in its different variants for last two decades.

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  18. साबुनों के मामले में बेचारा गोदरेज हमेशा फ्लॉप रहा है..एक साबुन आया था क्राउनिंग ग्लोरी जिसमें डिम्पल कपाड़िया ने (दोस्ती में) अपनी क्राउनिंग ग्लोरी का प्रदर्शन स्विमिंग पूल में किया था... लेकिन बात विज्ञापन के हद तक सिमट गई.
    एक साल में ग्यारह (अतिशयोक्ति के लिए क्षमा) साबुन लौंच करने के बाद भी इस बाज़ार में हिंदुस्तान लीवर और टाटा का मुक़ाबला नहीं कर पाए... बाकी के वैज्ञानिक तथ्य मेरे लिए जानकारी थे.धन्यवाद!!

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  19. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  20. मै तो पूरी पोस्ट में विज्ञानं को कितनी आसानी से लपेट के आपने जैसे पेश किया

    ........................उस पर पहली बार सबसे अधिक मुग्ध हुआ हूँ |


    भले ही बिक्री बढ़ जाए liyril2000 की ...पर विज्ञापन तो नहीं ही है पर हमारी भी सहमति की मोहर !


    {कुछ साबुन- रेक्सोना ,बच्चों का जान्संस बेबी सोप (कुछ बड़ी उम्र की महिलाओं को भी लगाते देखा है ..भाई ) भी जोड़ लिए जाएँ }

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  21. यह हुई न काम की चर्चा!
    मैं बहुत दिनों से सोच रहा था कि विज्ञापन से इतर कोई समझदार आदमी क्यों नहीं इस बात का जिक्र करता कि कौन सा साबुन अच्छा है!वरना पति देव जब पहली बार लिरिल खरीद कर घर लाते तो उनकी पत्नियाँ उन्हें ऐसे सशंकित निगाहों से देखा करती मानो वे झरने वाले विज्ञापन से कुछ अधिक ही प्रभावित हो गए हों! अब कहा जा सकता है कि नहीं भाई एक विद्वान की सलाह पर खरीदा है!

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  22. अपना तो लक्स फिक्स है। बाकी के जितने साबुन आए सब को आजमाने के बाद लक्स को फाइनल किया।

    कभी कभार हरा सिन्थॉल इस्तेमाल होता रहता है।

    वैसे साबुन के बहाने बढ़िया चर्चा चली है।

    गाँवों में बहुत पहले कहीं देखा था कि महिलाएं सिटके वाली मिट्टी से बाल धोती थीं। साबुन का इस्तेमाल कभी भी नही होता था।

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  23. @ प्रवीण त्रिवेदी जी's comment -

    पूरी पोस्ट में विज्ञानं को कितनी आसानी से लपेट के आपने जैसे पेश किया ....उस पर पहली बार सबसे अधिक मुग्ध हुआ हूँ |

    ------------

    प्रवीण जी,

    कभी आप अरविंद जी की लिखी विज्ञान कथा पर आधारित किताब 'एक और क्रौंच वध' पढ़िए......आप को बहुत पसंद आएगी । बहुत ही सरल और एक अलग नजरिए से लिखी गई किताब है - एक और क्रौंच वध।

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  24. तय नहीं कर पा रहा हूं कि त्वचा को टोनअप करूं या फेरोमॉन की चिन्ता करूं।

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  25. सुझाव के साथ अच्छी जानकारी भी ......धन्यवाद

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  26. आपने तो बिना विज्ञापन के ही सारा विज्ञापन दे दिया. जानकारी है.
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

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  27. निशांत जी ,
    हाँ आपने रानीपाल की खूब याद दिलाई और गाय घोडा और बन्दर छाप "देशी" साबुन श्रृंखला की भी
    और हाँ ,मनुष्य में फेरोमोंस अब विवाद के विषय नहीं हैं ,भूमिका पर विवाद अवश्य है !

    बिहारी बाबू ,
    क्राउनिंग ग्लोरी की क्या याद दिलाई आपने -हाँ, हिन्दुस्तान लीवर और टाटा ने साबुन बाजार पर अधिपत्य कर रखा है
    प्रवीण भाई ,आपको रेक्सोना की अच्छी याद ई -यह आज भी लोगों की पसंद है मगर मैंने कभी लगाई या नहीं लगाई -यह यद् नहीं है ...और हाँ काम्प्लीमेंट के लिए शुक्रिया ..असली मकसद तो विज्ञानं संचार का ही है ..घोडा घास से यारी कर कहाँ जाएगा .
    सतीश जी ,
    कहीं आप पोतनी मिट्टी की बात तो नहीं कर रहे जिसमें चिकनाई और रह काफी अधिक होती है ,गाँव में रीठा भी चलता था ..

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  28. सतीश जी ,
    पुनश्च ....
    एक और क्रौंच वध के प्रोमो के लिए आभार

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  29. पहले लक्स से नहाते थे जब रेखा विज्ञापन करती थी..अब फा से.. :)

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  30. घोर नाइंसाफी है..आपने हेमा मालिनी पर लहालोट होने की बात कह दी, लेकिन प्रीति जिंटा का नाम तक नहीं लिया :)

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  31. पाण्डेय जी ,आपने ले लिया ह्रदय शीतलता से तृप्त हुआ

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  32. अच्छा साबुन चिंतन ...!

    काश कि कोई साबुन होता जो मन का मैल भी मिटा सकता ...!

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  33. @वाणी जी
    च.. च.. च ..आपको इतनी जरूरत है आपने पहले क्यों नहीं बताया :)

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  34. किसको जरुरत है , कौन नहीं जानता ...:):)

    ईश्वर से हर प्रार्थना सिर्फ अपने लिए थोड़े ना की जाती है ...कुछ कार्य लोक हित में भी कर लेने पड़ते हैं ...!

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  35. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    काव्य प्रयोजन (भाग-९) मूल्य सिद्धांत, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

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  36. आप तो लिरिल के ब्रांड अम्‍बेसेडर ही बन गये। वैसे साबुन तो अच्‍छा है लेकिन हम तो किसी के भी होकर नहीं रह पाते। कारण हमारे डॉक्‍टर पतिदेव। आजकल एमआर भी गिफ्‍ट में साबुन बड़ा लाते हैं तो अब क्‍या करें? उन्‍हें वापरना तो पड़ता ही है ना। अपनी पसंद लिरिल को कैसे बनाएं?

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  37. @एक जीवशास्त्री होने के नाते मेरे अपने तर्क हैं ..रोज रोज साबुन लगाने से देह का मित्र जीवाणु फ्लोरा तो विलुप्तप्राय होता ही है ,साथ ही देह की कुदरती मानुष गंध -फेरोमोंन का भी सफाया हो जाता है
    You are encouraging people not to bath/ use soap.

    You are praising 'Liril 2000 BUT I can see your readers are not convinced :)they are sticking to their own choice.

    How many days one soap[Liril 2000] will last?

    After Soap ,Now someone will write post on toothpaste then toothbrush then....:D

    Interesting and 'informative 'post.Like it.

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  38. अपनी भी कुछ ऐसी ही कहानी है ...लाइफबॉय है जहाँ तंदुरस्ती है वहाँ ..
    वैसे में तो अब साबुन उपयोग करता भी नहीं ...

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  39. अच्छा हुआ जो मानुष गन्ध छू हुई वर्ना आप जानते हैं क्या होता ?

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  40. प्रोडक्ट्स की ब्रांड-बाजी जीवन को जटिल बनाती हैं ... सरलता तो तब है जब, कपडे धोने का, दाढ़ी बनाने का और नहाने का साबुन एक ही हो !

    और हाँ हंसने से पहले जान लीजिये यह जीवन दर्शन आईन्सटीन का था

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  41. अरविंद जी,
    मक्खन कल ही मुझसे कह रहा था कि ये लोग पता नहीं कैसे महीना-महीना नहीं नहाते, मुझे तो 29वें दिन ही खारिश शुरू हो जाती है...

    जय हिंद...

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  42. मिश्र जी,

    साबुन कोई भी हो कोई फर्क नहीं पड़ता
    हाँ कभी कभी मुल्तानी मिटटी का भी प्रयोग करता हूँ
    मुल्तानी मिटटी के प्रयोग के बाद जो शांति मिलती है .. वाह ... वाह.. क्या बताऊँ?? :)
    सारे महंगे साबुन एक तरफ और मुल्तानी मिटटी एक तरफ

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  43. वाकई यह विज्ञापन नहीं है ...आपके लेख से कुछ वैज्ञानिक जानकारी मिली ...

    मुझे तो एक ही साबुन बोर कर देता है ...मैंने सारे आजमाए हुए हैं ...लेकिन बचपन में बस लाइफबॉय ही घर में आता था ..कभी कभी हमाम भी :)

    बढ़िया रहा यह साबुन पुराण ..पर वाणीजी की बात सच में विचारणीय है

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  44. ऐसी साफ-सुथरी पोस्ट के लिये बधाई!

    वैसे मुलतानी मिट्टी से स्नान के बारे में क्या विचार हैं आपके, पंडित जी!

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  45. -
    -
    विज्ञान झागयुक्त लिरिल साबुनिया रोचक पोस्ट.
    साबुन का इतिहास भी साथ साथ चल रहा है.

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  46. समीर जी ,
    आपने जोड़ा फा -शानदार सोप ,शानदार लोगों का
    डॉ .अजित गुप्ता ,
    लिरिल का ब्लॉग अम्बेसडर कहिये न !

    @कृतिका,
    आपका आगमन सदैव संजीवनी सरीखा होता है ...बनने दीजिये न एक मानवोपयोगी उपभोक्ता उत्पाद ब्लॉग निर्देशिका !
    कुछ आप भी योगदान दें :)

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  47. अनाम भाई ,
    बात लाख टेक की है !
    गौरव ,
    मुलतानी मिती का अपना ही आनंद है -पत्नी जी को कभी कभी उठाते देखा है .

    संगीता जी ,
    आप कब से वाणी जी से प्रभावित होने लगीं -सख्यत्व भाव तो नहीं !

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  48. हमारे और केटरीना के बीच एक सम्बंध है.... हम दोनों लक्स का इस्तेमाल करते हैं :)

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  49. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  50. आज ही लिरिल लेकर आते हैं....अभी तक तो पियर्स से कम चल रहा था.......आप कह रहे हैं तो कुछ न कुछ बात जरुर होगी....सच में...

    regards

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  51. @For me :)..Till the time I was with my parents I used only and only 'lifebuouy' .lifebuouy changed its raper etc. but Papa did not change that soap till now.
    Once I was free to choose then I tried many soaps almost every new soap in the advertisement ...but My vote is for Chandrika ayurvedic bath soap.
    This Soap is from kerala but i like it.
    So,this way my name is added to the directory :D

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  52. @Thanks Kritika for this invaluable annotation!
    Let me search out Chandrika Aurvedic Bath Soap ...this is new to me..

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  53. नहाने के साबुन को कम से कम ३ मिनट तक शरीर पर लगा देना रहना चाहिये ताकि साबुन का क्लींजिंग एक्शन पूरा हो सके और यदि इस दौरान शरीर को मलते भी रहे तो यह प्रक्रिया जल्द पूरी होती है |
    लिरिल २००० भी ट्राई करते है ?

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  54. हे भगवान ………………।यहाँ तो साबुन की बाई पास कर दी………………पूरा इतिहास , भूगोल सब एक ही बार मे दर्शा दिया।

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  55. बदल डालो साबुन अब तो एक बार ,लिरिल साबुन सबसे बेहतर ,सबसे जोरदार :) कुछ बाते नयी जानी इस साबुन के बारे में ...शुक्रिया

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  56. अरविन्द जी , साबुन हफ्ते में एक बार और नाम गिना दिए ढेरों । वैसे हमने ऐसे भी लोग देखे हैं जो नहाते ही हफ्ते में एक बार हैं ।
    वैसे लिरिल वालों से कोई ---?

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  57. अपन तो साल का स्टोक इकटठा ही ले आते हैं, हाथ धोने के लिए लाइफबाय और नहाने के लिए डेटॉल। लेकिन जब इतने प्यार से इसकी तारीफ बता रहे हैं, तो ट्राई तो करना ही पडेगा।

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  58. अरे हाँ पंडित शर्मा जी ,सही कहा ब्रीज ! और एक और छूट रहा है गोदरेज का नम्बर १

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  59. लगता है आपने जरूर साबुन कंपनियों से पैसा लिया है यह साबुनिया पोस्ट लिखने के लिये. वैसे यह साबुन क्या होता है?:)

    रामराम.

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  60. क्या बात है भैया जी आज तो एकदम लिरिल की एड बना डाली ।
    वैसे पिछले साल मैने खादी ग्रामोद्योग से खस साबुन लिया था बहुत ही अच्छा लगा । जब भी मिलता है वही बरतते हैं । उससे पहले तो मोती, लक्स, लिरिल, सिन्थॉल मैसोर सेन्डल पियर्स जो भी मिल जाये ।

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  61. आपकी टिपण्णी, हौसला अफजाही और उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
    वाह! बहुत बढ़िया और दिलचस्प पोस्ट है! मुझे तो लिरिल, पीअर्स, सिंथोल और लक्स बेहद पसंद है और लिरिल का विज्ञापन तो अभी भी याद है! सबसे बेहतरीन विज्ञापन हुआ करता था लिरिल का और उसके अलावा कोई साबुन लगाने का मन नहीं करता था! पर अब तो इतने नए नए साबुन निकल गए और उनमें से मुझे डोव बहुत पसंद है!

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  62. vah bhaiya, khud bhale naaga maar dete ho lekin ham jaison ko nahala maroge. main to padh ke hee bheega-bheega mahsoos karane laga. daftar men hoon, yahaan taulia bhee naheen milegee, kurte se hee deh ponchhanee padegee. chalo kuchh upay karata hoon.

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  63. आपका बहुत बहुत शुक्रिया मिश्रा जी आप मेरे ब्लॉग पर पधारे ... और आप जैसे गुनी व्यक्ति का कहा सर माथे ... मैंने अपने ब्लॉग से वर्ड वरिफिकेशन हटा दिया है...आगे भी मार्ग दर्शन करते रहिये....

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  64. बहुत ही अच्छी पोस्ट ... जानकारी भी मनोरंजन भी... कभी एंटी एजिंग क्रीम्स के बारे में भी जानकारी दीजिये .. आज कल बहुत धूम है उनकी...:)

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  65. सबसे अच्छा लगा विषय का चयन .साबुनों पर भी लिखा जा सकता है , समझ आया.
    इस तरह तो टूथपेस्ट , आडोमास , मास्कीटों काइल, घमौरी नाशक पाउडर इत्यादि पर भी लिखा जा सकता है .

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  66. मैं तो ताऊ के साथ हूँ आज ! फिफ्टी फिफ्टी कर लो तो कुछ बात बने !

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  67. mishra ji i m so sorry ... actually blogging mein nai hoon to thori chook ho gayi shaayad save settings nahi kiya tha... ab kar diya hai ... thanku so much ....

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  68. अरविन्द भाई लगता तो ये साबुन का विज्ञापन सा ही है...:) किन्तु बहुत सी जानकारियाँ भी प्राप्त हुई। अच्छा लगा पढ़कर।

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  69. यहाँ सभी लोग नहा लिये और मैं अब आ रही हूँ। अब पतिदेव का किसी भी साबुन से नहाना बन्द कारण आपने बता ही दिया। बडिया पोस्ट।

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  70. वाकई यह साबुन का विज्ञापन नहीं है
    ....लिरिल २००० भी ट्राई करते है!
    जानकारी के लिए धन्यवाद.

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  71. हमें तो आजकल यह भी पता नहीं चलता कि काहे से नहा रहे हैं नहा भी रहे है कि नहीं ,वो दिन हवा हुये जब पसीना गुलाब

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  72. सरजी आपने लेख पूरा करने का आदेश दिया है मै पूरी कोशिश कर रहा हूं बस इन्तजार इस बात का है कि कही से घोडे की नाल मिल जाये।इसी बीच सतीश सक्सेना जी ने शर्त लगादी कि घोडा काला होना चाहिये । वैसे राजभाािटया जी के पास एक यंत्र है लेकिन वे उसकी कीमत 10लाख बता रहे है

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  73. मुझे आपका शायरी बेहद पसंद आया! आपकी टिपण्णी और हौसला अफजाही के लिए शुक्रिया! आप इतने बड़े लेखक हैं और आपसे कुछ सिखने को मिले ये तो मेरे लिए सौभाग्य की बात है!

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  74. अरविंद भाई हमारे ब्लॉग को प्रोबेशन में डाल कर आप सो गये लगता है...:) नही पहचान पाये न? अच्छा चलिये जब पहचान जाइयेगा एक मेल कर दीजियेगा अपनी इस बहन को। वैसे तो बहुत लोग है ब्लॉगिंग में हमारे किंतु आपको भी एक लम्बे समय से जानते हैं। कुछ समय बाद हम सोच रहे हैं अपने इष्ट मित्रों से हम भी पहेली पूछेंगे सोचते हैं शायद पहचान जायें...शायद। हाँ चीटींग होगी अगर आई पी एड्र्स वगैरह देखेंगे...:)

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  75. आपने अच्छा किया कि शीर्षक में ही बता दिया कि यह विज्ञापन नहीं है, अन्यथा हम लिरिल का विज्ञापन ही समझते | साबुन के सन्दर्भ में मैं सदा से ही अलग अलग ब्रांड का उपयोग करता रहा हूँ | मोती का जिक्र कर के आपने याद दिला दिया कि नया मोती साबुन अपने गोल और बड़े आकार के कारण प्रायः हाथ से फिसल जाया करता था, कुछ पुराना हो जाने पर उसका आकार छोटा हो जाता था और नहाने में सुविधा रहती थी | आपके लेख में मैसूर संदल का नाम नहीं था लेकिन टिपण्णी में पाकर संतोष हुआ | आजकल मैं प्रायः डेटोल, सेवेलोन,मार्गो, चंद्रिका,पियर्स और सिंथोल का उपयोग करता हूँ | कुछ दिन पहले ही मुझे बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद द्वारा निर्मित मुल्तानी मिट्टी के साबुन को प्राप्त करने का अवसर मिला | यदि यह साबुन हमारे शहर में उपलब्ध हुआ तो भविष्य में इसे ही उपयोग करने का विचार है| कुछ वर्ष पूर्व मैंने अपने एक परिचित, जो रिटायरमेंट की उम्र के करीब थे, से उनके चहरे की त्वचा की चमक का राज पूछा | उन्होंने बताया कि उन्होंने चेहरे में कभी भी साबुन का प्रयोग नहीं किया है | वे सदा मुल्तानी मिट्टी का ही प्रयोग करते रहे हैं |

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  76. टिप्पणी में देर हुई। सोचा,पहले आजमा लूं। मेरा अनुभव भी ठीक आप जैसा रहा।

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  77. देशज पौधे Melaleuca alternifolia के सन्दर्भ में इतना घुमाव दार लेख लिखने के लिए शुक्रिया..सुन्दर!!

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  78. एक एसएमएस-

    एक रेक्सोना नाम की लड़की थी जिसके पेरेंट्स का नाम डायना और
    सिंथोल था.

    एक मार्गो नाम का लड़का था.

    जो रेक्सोना को लव करता था.

    और

    रेक्सोना भी मार्गो को अपना लाइफ-बॉय बनाना चाहती थी.दोनों का लव पीयर्स की तरह साफ़ था.

    दोनों की शादी फेयर एंड लवली गार्डेन में होती है.

    शादी में डिटाल ,

    मेडीमिक्स,

    लक्स,

    फा,

    निरमा,

    विवेल आदि

    आते हैं.

    शादी के कुछ साल बाद उनके जुडवा बच्चे होते हैं जिनका नाम है-

    जॉन्सन एंड जॉन्सन



    ये एक तरिका था.

    आपको बताने का की बाजार में इतने साबुन मिलते हैं.

    अब तो नहाइए.....
    सुप्रभात !

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  79. ऋण! ऋण !! ऋण !!!
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